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PAN कार्ड को लेकर बदले नियम, छोटे लेन-देन में राहत, बड़े ट्रांजैक्शन पर बढ़ी सख्ती

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू नए आयकर नियमों के तहत PAN कार्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना, डिजिटल रिपोर्टिंग को मजबूत करना और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। नए नियमों के तहत बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए PAN कार्ड की अनिवार्यता बरकरार रखी गई है, जबकि कुछ छोटे और कम जोखिम वाले ट्रांजैक्शनों में लोगों को राहत दी गई है।

सरकार का मानना है कि वित्तीय गतिविधियों की बेहतर निगरानी के लिए बड़े लेन-देन को PAN से जोड़ना आवश्यक है। इससे आयकर विभाग को संदिग्ध या असामान्य वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। वहीं, छोटे लेन-देन में प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आम नागरिकों को सुविधा देने का प्रयास किया गया है।

इन मामलों में नहीं होगी PAN की अनिवार्यता

नए नियमों के अनुसार कुछ सीमित और कम मूल्य वाले वित्तीय लेन-देन में PAN कार्ड देना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को Form 97 जमा करना पड़ सकता है। जिन गतिविधियों में यह छूट दी गई है, उनमें कम मूल्य के बैंकिंग लेन-देन, सीमित नकद भुगतान, निर्धारित सीमा के भीतर संपत्ति संबंधी कुछ सौदे, छोटे निवेश, कम राशि के होटल एवं रेस्तरां भुगतान, सीमित बीमा और वित्तीय सेवाएं तथा विशेष शर्तों के तहत कुछ बेसिक बैंक खाते खोलना शामिल हैं।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि PAN की अनिवार्यता से छूट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि ऐसे लेन-देन की निगरानी नहीं होगी। सभी ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड किए जाएंगे और आवश्यक होने पर उनकी जानकारी आयकर विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

बड़े लेन-देन में PAN रहेगा जरूरी

सरकार ने हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए PAN कार्ड को अनिवार्य बनाए रखा है। नए नियमों के अनुसार एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा या निकासी, 50 हजार रुपये से अधिक का म्यूचुअल फंड निवेश, 2 लाख रुपये से अधिक की नकद खरीदारी, 45 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड, डिमैट खाते या ऋण के लिए आवेदन तथा बड़े फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्ड निवेश में PAN कार्ड प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रावधानों से बड़ी रकम के लेन-देन की निगरानी आसान होगी और वित्तीय प्रणाली अधिक पारदर्शी बन सकेगी।

Form 60 की जगह अब Form 97

नए नियमों के तहत एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब तक PAN उपलब्ध न होने की स्थिति में उपयोग किया जाने वाला Form 60 समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह Form 97 लागू किया गया है। हालांकि यह फॉर्म सभी प्रकार के लेन-देन के लिए मान्य नहीं होगा। विशेष रूप से बड़े और उच्च मूल्य वाले ट्रांजैक्शन में PAN कार्ड देना अनिवार्य रहेगा।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

नए नियमों का प्रभाव आम नागरिकों की दैनिक वित्तीय गतिविधियों पर भी दिखाई देगा। छोटे और सीमित मूल्य वाले लेन-देन अपेक्षाकृत आसान हो जाएंगे, जबकि बड़े वित्तीय सौदों में दस्तावेजी प्रक्रिया और निगरानी बढ़ेगी। बिना PAN कार्ड के बड़ी खरीदारी, निवेश या अन्य उच्च मूल्य के वित्तीय लेन-देन करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नए प्रावधान वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देंगे और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे। साथ ही करदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने PAN से जुड़ी सभी जानकारियां अद्यतन रखें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।